तब्लीगी ज़मात का फरेब
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*🥀 तब्लीगी जमात का फरेब 🥀*
✏️पोस्ट लंबी है लेकिन जरूर पढ़ना ईमान ताज़ा हो जायेगा !
क्या किसी को यह कह कर धोखा दिया जा सकता है , की आएये साहब मैं आप को धोखा दे रहा हु नहीं ना ? बल्कि धोखेबाज़ पहले हमदर्दी और मोहब्बत की बात करके बाद में धोखा देता है !
जब शिकारी किसी परिंदे को शिकार बनाना चाहता है तो वह उसी की बोली बोलता है , हालाँकि शिकारी इंसान होता है , लेकिन अपने मकसद के लिए परिंदा बन जाता है !
ये 2 मिसालें दी है सिर्फ समजने के लिए , अब तब्लीगी जमात की असलियत देखे ?
अब आप तब्लीगी जमात का हकीकी रूप उन्ही की किताबो की रौशनी में मुलाहिज़ा फरमाईये ! किसी भी मजहब या तहरीक के मकसद मालूम करने का अहम तरीन जरिया उस तहरीक के बानी और अकबिरिंन की किताबो से होता है !
तब्लीगी जमात के बानी मौलवी इल्यास है , उनके अलावा मौलवी युसूफ , मौलवी जकरिया , मौलवी मनज़ूर नौमानी , तब्लीगी जमात के अहम् सुतून तसवूर किये जाते है ! तब्लीगी जमात के अकबिरिन में मोलवी इस्माइल देहलवी , मौलवी अशरफ अली थानवी , रशीद अहमद गंगोइ , कासिम नानोतवि वगैरह शामिल है ! और आप इनके कुफ्रिया अक़ीदे जानते है !
खुद मौलवी इल्यास लिखते है की हजरत थानवी रहमतुल्लाह अलैहि ने बहुत बड़ा काम किया है , बस मेरा दिल चाहता है के तालीम तो उनकी हो और तरीका तबलीग मेरा हो , किस तरह उनकी आम हो जायेगी !
📚( हवाला : मल्फूजात मौलाना इल्यास )
✏️इस तरह दूसरी जगह मौलवी इल्यास लिखते है की हजरत रशीद अहमद गंगोई इस दौर के कुतुब इरशाद और मुजद्दीद थे !
📚( हवाला : मल्फूजात इल्यास )
✏️यही रशीद अहमद गंगोही लिखते है की मौलवी इस्माइल देहलवी की किताब तक्वीयतुल इमांन हर घर में रखना ऐन ईमान है !
📚( हवाला : फतावा राशिदिया )
✏️मौलवी कासिम नानोतवि के बारे मे सिर्फ इस कदर लिखना काफी है की वह मदरसा ए देवबंद के बानी है ! जहा से बर्रे सगीर के मुसलमानो के कुलूब से इश्के मुस्तफा सल्ललाहु अलैहि व सल्लम का जज्बा खत्म करने की तहरीक शुरू हुई !
यह तो थे तबलीग जमात के अकाबिर ! लेकिन हो सकता है के कोई शख्स इन हजरत को अक़ाबिर मानने से इनकार कर दे ! इसलिए की इन हजरात ने अपनी किताबो में नबी ए पाक की शान में गुस्ताखियां की है ! लेकिन इस इनकार से कुछ हासिल नहीं हो सकता ! इसलिए अव्वल तो खुद मौलवी इल्यास बानी तब्लीगी जमात के मरकजी इस्तेमा गाह के बाहर लगाये जाने वाले बुक स्टालो से उन अकाबेरिन तब्लीगी जमात की किताबे फरोख्त की जाती है ! क्लब इसके की तब्लीगी जमात के इन अकाबेरिन की तालीमात का असल नक्शा हदया-ए-कारेयिन किया जाये , एक और वजाहत यह करनी है की अगर सहिउल अक़ीदा सुन्नी से पुछा जाये की आप अपने अकाबेरिन के नाम बताईये तो वो फ़ौरन हजरते इमाम हुसैन /हसन , इमाम अबु हनीफा , हजरत गौसे आज़म , हजरत ख्वाजा अजमेरी , हजरत मुजद्दीद अल्फेसानी और हजरत इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी बरेलवी रजी अल्लाहु अन्हुम अज्मयिन का नाम गिनवा देगा ! लेकिन चूँकि तबलीगी जमात की किताबे रसूल अक्रम की शान में गुस्ताखियां से भरी पड़ी है , इसलिए वह अपने अकाबेरिन का नाम बताने में शर्म महसूस करते है ! खैर ये तो अपनी अपनी किस्मत की बात है ! अब आईये अकाबेरिन तब्लीगी जमात की किताबो से उनकी तालीमात मुलाहिजा फरमाईये !
मौलवी इस्माइल देहलवी की तालीमात
1) नमाज़ में नबी ए पाक की तरफ ख्याल ले जाना अपने गधे और बैल के ख्याल में डूब जाने से बदरजहा बेहतर है !
2 ) हर मखलूक बड़ा हो या छोटा अल्लाह की शान के आगे चमार से भी जियादा जलील है ! ( यानि की तमाम नबी फ़रिश्ते वाली इंसान सब के सब )
3) हुजूर की ताज़ीम बड़े भाई के बराबर करना चाहिए क्यों की आप भी इंसान है !
📚( हवाला : तक्वीयतुल ईमान )
✏️मौलवी कासिम नानोतवि की तालीमात
1 ) नबी ए पाक के बाद भी अगर कोई नबी आये तो उससे खत्मीयते मोहम्मदी में कोई फर्क नहीं पड़ेगा !
📚( हवाला : तहजिरुनास )
✏️मौलवी रशीद अहमद गंगोही
1 ) लफ्ज़ रहमतुललिल आलमीन सिफत खासए रसूल्लाह सल्ललाहु अलैहि व सल्लम नहीं है
📚( हवाला : फतावा राशिदिया , जिल्द -2 )
✏️यानि की नबी ए पाक के बाद भी किसी को रहमतुललिल आलमीन कहा जा सकता है , नौजबिल्लाह
2) सुन लो हक़ वही है जो रशीद अहमद गंगोही की जुबान से निकलता है , और बक्सम कहता हु की मैं कुछ नहीं हु मगर इस ज़माने में हिदायत व निजात मौक़ूफ़ है मेरी इब्तेदा ( पैरवी ) पर !
📚( हवाला : तजकिरतुरशीद जिल्द -2 )
👉 नोट - यह दावा है जो सिर्फ अंबिया करीम करते रहे है , लेकिन रशीद अहमद गंगोही अपने मुताल्लिक यह दावा कर रहे है , क्यों ? यह फैसला कारेयिन ( पढ़नेवाले ) खुद करे !
मौलवी अशरफ अली थानवी
1) यह बात तो आम है की नबी ए पाक के इल्मे ग़ैब को तमाम पागलो और जानवरो से तशबिह दी थी ! जिसपर सुन्नी उलेमा-ए-हिजाज , हिन्द और पाक के उलेमाओं ने उनपर कुफ्र का फतवा लगा दिया था !
📚( हवाला : हिफ़ज़ूल ईमान )
✏️2) किसी मुरीद ने थानवी साहब को लिखा की - मैंने ख्वाब में देखा की ला इलाहा इल्लला के बाद अशरफ अली रसूलअल्लाह मुह से निकल जाता है ! जब बेदार होकर कोशिश करता हु की सही कलिमा और सही दरूद पढ़ु लेकिन जुबान काबू में नहीं है ! हर जगह मुहमद रसूलअल्लाह पढ़ने की जगह असरफ अली रसूल अल्लाह निकलता है !
मौलवि थानवी इसके जवाब में लिखता है की इस वाकये में तसल्ली है , इसलिए की मैं सुन्नत की इब्तेदा करता हु और इस तरह तुम्हारा पढ़ना जायज़ है !
📚( हवाला : रिसाला अल इमदाद )
✏️हवाले और भी है इन मक्कार मौलवीयो के लेकिन बहुत लंबी हो जायेगी ! अब आप खुद देख लो की तबलीग किस की हो रही है इन लोगो के हिसाब से ! तब्लीगी जमात का हकीकी रूप बेनकाब हो कर आप के सामने आ गया है ! अब आप खुद फैसला करे की कौन हक़ पर है और कौन नहीं !
तब्लीगी जमात के साथ तो नजद के बादशाह और उनके जानशीन है , पूरी नजदी हुकूमत है और नजद के रियाल पर उनका सारा कारोबार चल रहा है ! ताकि जिस तरह नजदि कौम ने मक्के और मदीने में बड़े बड़े सहाबा और अहले बैत के मज़ारात और रसूल ए पाक की यादगार में बनायीं हुई मस्जिद तोड़ कर खंडहर बना दिया !
हिन्दुस्तान में भी ख्वाजा और साबिर , महबूब और मखदूम , शहीद और क़ुतुब के मजारो के साथ वही खेल खेला जाये , और इस तरह शैतान की वही साजिश कामयाब हो जाये की रुए जमीन पर खुदा के मेहबूब बन्दों की कोई निशानी बाकि न रहे !
दुआ की गुजारिश
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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