हुज़ूर ﷺ को आलिमुल गैब कहना कैसा है*24

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*🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ*
*🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ*
*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*

*🧮 पोस्ट 029▪️*

*📝 सवाल-;*
*📇     हुज़ूर ﷺ को आलिमुल गैब कहना कैसा है*


*✍️ जवाब -:* 
*📇     मना है बाज़ (कुछ) अल्फाज़ की खुसूसिय्यत होती है कि वह अल्लाह तआला के साथ खास होते हैं उनका इतलाक (बोलना, इस्तेमाल) अल्लाह तआला के इलावा किसी पर नहीं होता जैसे रहमान कि अगरचे हुज़ूर ﷺ रहमतुललिल आलमीन है मगर हुज़ूर ﷺ को रहमान कहना मना है इसी तरह अगरचे हुज़ूरे अक्दस ﷺ गैब जानते हैं मगर आलिमुल गैब कहना मना है मगर वहाबी इस से ये मुराद लेते हैं कि हुज़ूरे अक्दस ﷺ गैब नहीं जानते यह उनकी गुमराही है अहले सुन्नत व जमाअत जिसे पहचान या इम्तियाज़ के लिए इस ज़माने में मसलके आला हज़रत से ताबीर करते हैं उनका अकीदा है कि हुज़ूरे अक्दस ﷺ आलमे गैब है मगर आलिमुल गैब नहीं पीरो मुर्शीद हुज़ूर ताजुश्शरीआह अलैहिर्रहमा इरशाद फरमाते हैं बेशक आलिमुल गैब का इतलाक गैरुल्लाह के लिए रवां नहीं और रहा आपकी निस्बत हमारा यह कहना कि हुज़ूर ﷺ आलिमुल गैब हैं बिलकुल इफ्तरा (इल्ज़ाम, बोहतान) है इसका इतलाक (बोलना) गैरे खुदा के लिए हम अहले सुन्नत व जमाअत के नज़दीक हराम व नाजाइज़ है मज्कूरा हवालों से अहले सुन्नत व जमाअत का अकीदा साबित हो गया कि रसूल अल्लाह ﷺ के लिए आलमे गैब का अकीदा रखना चाहिए आलिमुल गैब का नहीं आलिमुल गैब खुदाए तआला की ज़ात है अब रहा कि इन दोनों के दरमियान फ़र्क क्या है तो फ़र्क यह है कि आलिमुल गैब का इतलाक किया (बोला) जाता है ज़ाती (यानी जो खुद का हो उस) पर और आलमे गैब का इतलाक होता है अताई (जो किसी को दिया गया हो उस) पर*
*📚 फतावा शारेह बुखारी जिल्द अव्वल सफा 448*
*📚 फतावा गौसो ख़्वाजा जिल्द अव्वल सफा 94*
*📚 अनवारे रज़ा सफा 35,134*
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*🔛((((( अगली पोस्ट जल्द )))))*



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*👏🏁 गदा ए फ़कीर रज़वी क़ादरी हनफ़ी बरेलवी 🔴* *جزاک اللہ خیر*
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