उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद* *व हक़ाइक़0️⃣2️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴

          

         *🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
                           *व हक़ाइक़ 🥀*


                ┎━─━─━─━─━─━─━─━┒
                  *पोस्ट नम्बर:- 02*
          ┖━─━─━─━─━─━─━─━┚

 ❖ *नोट:* 👉"हवालाजाती किताबों के पब्लिशर का एक दफ़ा हवाला दे दिया गया है बाक़ी हर जगह उसी पब्लिशर की किताब से हवाला दिया गया है, दूसरे पब्लिशर्ज़ की किताबों या एडीशन के लिहाज़ से सफ़हात आगे-पीछे हो सकते हैं"

*(1) अल्लाह तआ़ला झूठ बोल सकता है*

                    *(म'आज़ अल्लाह)*

    "अलहासिल इम्कान ए किज़्ब (झूठ) से मुराद दखूले किज़्ब (झूठ) तहत ए कुदरत ए बारी तआ़ला है जमीअ़ मुहक़्क़िक़ीन अहले इस्लाम सूफ़ियाए किराम, उलमा ए उज़्ज़ाम का मज़हब इस मस्अ़ले में ये है कि किज़्ब (झूठ) दाख़िल तहते क़ुदरत बारी तआ़ला है"

     *📚(सफ़ह- 237)* "बस साबित हुआ के किज़्ब दाख़िल तहते कुदरत बारी तआ़ला जल्ला ओ आला है, क्यूँ न हो वहुवा अ़ला कुल्लि शयइन क़दीर" 

  *📚(सफ़ह- 238 फ़तावा रशीदिया, तहरीर- रशीद अमहद गंगोही)*

*(2) अल्लाह तआ़ला को पहले से इल्म नहीं होता के बन्दे क्या करेंगे*

                   *(म'आज़ अल्लाह)*

"और इन्सान ख़ुद मुख़्तार है अच्छे काम करे या न करे और अल्लाह को पहले उससे कोई इल्म नहीं, कि क्या करेंगे बल्कि अल्लाह को उनके करने के बाद मालूम होगा" 

    *📚(बलग़तुल हैरान, सफ़ह 157-158 मतबुआ मकतबा- उख़ूवत नज्द लाहौर, तहरीर हुसैन अली देवबन्दी)*

*(3) शैतान और मलकुल मौत का इल्म, हुज़ूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ज़्यादा है*

                    *(म'आज़ अल्लाह)*

   "शैतान व मलकुल मौत का हाल देखकर इल्म मुहीत ज़मीन का फख़्रे *आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* को ख़िलाफ़े नुसूसे कतइया के बिला दलील महज़ क़यासे फ़ासिदह से साबित करना शिर्क नहीं तो कौन सा ईमान का हिस्सा है ? शैतान को और मलकुल मौत को ये उसअ़ते नस *(क़ुरआन पाक की आयात)* से साबित हुई। फख़्रे आलम की उसअ़ते इल्म की कौन सी नसे कतई है ?"

   *📚(बरहीने क़ातियह, सफ़ह 51 मतबूआ मौलवी मुहम्मद यहिया कुतुब देवबन्द सहारनपुर, तहरीर रशीद अहमद गंगोही व खलील अहमद अम्बेठ्वी)*

*(4) नमाज़ में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का ख़्याल बैल और गधे के ख़्याल से भी बुरा है,*

                     *(म'आज़ अल्लाह)*

     "(नमाज़ के वसवसों के बयान में) ज़िना के वससवे से अपनी बीवी की मुजामेअ़त का ख़्याल बेहतर है और शैख़ या उसी जैसे बुजुर्गों की तरफ़ ख़्वाह कि *जनाबे रिसालत मआ़ब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* ही हों, अपनी हिम्मत (ख़्याल) को लगा देना, अपने बैल और गधे की सूरत में मुस्तग़रक (डूबने) होने से बुरा है" 

     *📚(सिराते मुस्तक़ीम (उर्दू) सफ़ह 17 मतबुआ कुतुबखाना रहीमिया देवबन्द, तहरीर: इस्माईल देहलवी)*

  *📚 (उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद व हक़ाइक़, सफ़ह- 02)*

*📍नोट:-* आप सभी हमारी इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करने की कोशिश करें *और याद रहे पोस्ट में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बिल्कुल भी न करें..!*

*📍नोट:-* अगर आप चाहते हैं कि हमारी नये नये उन्वान पर नई नई पोस्ट आपको मिलती रहें तो हमारे वाट्सप ग्रुप की लिंक पर क्लिक करें और जल्द ही एड हो जाएं👇🏻
     

👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
https://chat.whatsapp.com/BlTnmJKrHakLQ0Y3Q9Q1KC

Comments

Popular posts from this blog

उलेमा ए देओबन्द की वो गुस्ताखी थी जिसकी वजह से उनपर 33 उलेमा ए हरमैन ने कुफ्र का फतवा दिया

देवबन्दियों का तबरी2️⃣3️⃣

Kya Auliya ALLAH Gaib Jante Hai Aur Jo Dil Me Kya Wo Bhi Jante Hai*