उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद* *व हक़ाइक़ 0️⃣5️⃣
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*🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
*व हक़ाइक़ 🥀*
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*पोस्ट नम्बर:- 05*
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*(12) हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मरकर मिट्टी में मिलने वाले हैं (एक झूठी गढ़ी हुई हदीस)*
*(म'आज़ अल्लाह)*
हुज़ूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है कि मैं भी एक दिन मरकर मिट्टी में मिलने वाला हूँ"
📚 *(तक़वीयतुल ईमान मअ़ तज़कीरूल अख़्वान, सफ़ह-81)*
इस्माईल देहलवी ने हुज़ूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ़ से झूठ मन्सूब किया है और इन देवबन्दियों का ये अक़ीदह क़ुरआन व हदीस के खिलाफ़ है क्यूँकि हदीस शरीफ़ से आता है कि "बेशक अल्लाह तआ़ला ने हराम फ़रमा दिया। पस (बस) अल्लाह के नबी ज़िन्दा होते है और उन्हें (क़ब्र में) रिज़्क़ भी दिया जाता है"
*📚 (इब्ने माज़्ज़ह, मिशकात शरीफ़)*
*तबसरह:-* इस्माईल देहलवी ने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मुताल्लिक़ झूठ बोला और हदीस शरीफ़ में इसकी ये सज़ा है कि-" सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फरमाया मुझसे झूठी बात मन्सूब न करो, क्यूंकि जो मेरे मुताल्लिक़ झूठ बोले वो जहन्नुम में डाला जायेगा"
*📚 (सहीह बुख़ारी, जिल्द-1, किताबुल इल्म)*
तो इस हदीसे मुबारका से ये साबित हुआ कि इस्माईल देहलवी का ठिकाना जहन्नम है।
*(13) "रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम" बड़े भाई*
*(म'आज़ अल्लाह)*
एक अदना सा आदमी है कि वह कह रहा है, *"रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम" मेरे बड़े भाई हैं।* अगर किसी ने बेवजह बनी आदम (आदम की औलाद) होने के साथ "आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम" को भाई कहा तो क्या ख़िलाफे नस (यानी क़ुरआने पाक की आयात के खिलाफ़) कह दिया।
*📚 (बराहीने क़ातियह, सफ़ह-3, तहरीर: ख़लील अहमद अंबेठवी)*
*तबसरह:-* आप इनके इस अक़ीदे का मुकम्मल रद क़ुरआन और हदीस से ऊपर मुलाहिज़ा फ़रमा चुके हैं। फ़र्ज़ कीजिए कोई शख़्स अपनी खालाज़ाद बहन से शादी के बाद उसे बहन कहे तो क्या उसकी शादी बरकरार रहेगी? इसी तरह *नबी-ए पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* के लिए ऐसे अल्फ़ाज़ इस्तेमाल करना बेअ़दबी और बेईमानी है।
*(14) नबी का झूठ से पाक होना ज़रूरी नहीं*
*(म'आज़ अल्लाह)*
नबी का हर झूठ से पाक और मासूम होना जरूरी नहीं
*📚 (तस्फ़ीयतुल अक़ाइद, सफ़ह- 25 सैयद मालिक कुतुबखाना अज़ीज़िया देवबन्द, तहरीर: कासिम नानौतवी)*
*(15) अम्बिया की शान में गुस्ताख़ी...*
*(म'आज़ अल्लाह)*
"सब बन्दे बड़े (यानी अम्बिया) हों या छोटे (यानी बाक़ी सब) यकसां (एक जैसे) हैं, बेखबर हैं और नादान हैं"
*📚(तक़वीयतुल ईमान मअ़ तज़किरूल अख़्वान, सफ़ह- 33)*
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