हिन्दू त्यौहार होली या दीवाली का खाना दुरुस्त मगर ईद मीलादुन्नबी सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम और ग्यारहवीं शरीफ बिद'अत. 0️⃣8️⃣

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         *🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
                           *व हक़ाइक़ 🥀*


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                  *पोस्ट नम्बर:- 08*
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*(29) हिन्दू त्यौहार होली या दीवाली का खाना दुरुस्त मगर ईद मीलादुन्नबी सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम और ग्यारहवीं शरीफ बिद'अत..*

                     *(म'आज़ अल्लाह)*

"हिन्दू त्यौहार होली या दीवाली का खाना दुरुस्त है" 

  *📚(फ़तावा रशीदिया, सफ़ह-614, तहरीर: रशीद अहमद गंगोही)*

 अशरफ़ अली थानवी देवबन्दी से एक आदमी ने सवाल किया कि अगर ग्यारहवीं की मिठाई आए तो उसको क्या करें, थानवी साहब ने फ़रमाया कि "लेकर कहीं दफ़न कर दें" 

*📚(मलफ़ूज़ात हकीमुल उम्मत, जिल्द - 23, सफ़ह-209)*

*सवाल:-* बच्चों की सालगिरह और उसकी ख़ुशी में अतआमुल त'आम (खाना खिलाना) करना जाइज़ है या नहीं?

*जवाब:-* सालगिरह के वास्ते कुछ हरज नहीं, और बाद साल के बवजह अल्लाह तआ़ला खिलाना भी दुरुस्त है।
 
  *📚(फ़तावा रशीदिया, सफ़ह-606, तहरीर: रशीद अहमद गंगोही)*

*सवाल:-* महफिले मीलाद में जिसमें रिवायात सही पढ़ी जायें और लाफ़ो-गिजाफ़ (फ़िज़ूल बातें) और रिवायात मौजुआ़ और काज़िबा (ग़लत और झूठी रिवायात) न हों, शरीक होना कैसा है?

*जवाब:-* नाजाइज़ बसबब और दोज़ख के 

  *📚(फ़तावा रशीदिया, सफ़ह-273, तहरीर: रशीद अहमद गंगोही)*

 *तबसरह:👉🏻* इन तमाम सवाल व जवाब को पढ़कर आपको अन्दाज़ा होगा कि हिन्दुओं के त्योहारों का खाना जाइज़ और नबी-ए करीम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के साथ बुग़्ज व अ़नाद (दुश्मनी) का ये हाल, कि ऐसी महफिल जिसमें सही रिवायात यानी नबीए पाक की सीरत बयान की जाती हो वह हर हाल में नाजाइज़ और ग्वारहवीं का खाना शायद इसलिए नहीं खाते कि क़ुरआने पाक में अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ने इर्शाद फ़रमाया "तो खाओ उसमें से जिस पर अल्लाह का नाम लिया गया हो अगर तुम उसकी आयतें मानते हो और तुम्हें क्या हुआ कि उसमें से न खाओं जिस पर अल्लाह का नाम लिया गया" 

      *📚 (सूरए इनआम, आयत-118)*

     ये अल्लाह तआ़ला मुश्रिकों से फ़रमा रहा है। आप अन्दाज़ा लगाएं कि ग्यारहवीं शरीफ़ के खाने पर क़ुरआन पाक के अलावा कोई और चीज़ पढ़ी जाती है, लेकिन ये लोग नहीं खाते तो ये किसकी पैरवी कर रहे हैं ?

*(30) देवबन्दियों की मरग़ूब गिज़ा "कव्वा" खाना सवाब*

*सवाल:-* जिस जगह जागे मारूफ़ा (आम कौआ) को अकसर हराम जानते हों और खाने वाले को बुरा कहते हों तो ऐसी जगह उस कौआ खाने वाले को कुछ सवाब होगा, या न सवाब होगा न अज़ाब होगा ?

*जवाब:-* "सवाब होगा" 

   *📚(फ़तावा रशीदिया, सफ़़ह-637 तहरीर: रशीद अहमद गंगोही)*

*तबसरह:-* अब ज़रा नबी-ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हदीसे मुबारका सुन लें "इब्ने उमर रदिअल्लाहु तआ़ला अन्हु से रिवायत है कि जो शख़्स कौआ खाता है तहकीक़ उसका नाम नबीए पाक ने फ़ासिक़ (गुनाहगार, बदकार) रखा है" 

            *📚 (इब्ने माजा शरीफ़)*

     देवबन्दियों की इस मरग़ूब गिज़ा से अन्दाज़ा लगाया जा सकता है, कि कौआ खाने वाले मौलवी मोमिन होगें या फासिक़ ?

*(31) रशीद अहमद गंगोही सबका मुरब्बी (पालने वाला)*

 मौलवी महमूदुल हसन देवबंदी ने रशीद अहमद गंगोही के मरने पर एक मर्शिया लिखा है जिसमें उन्होंने लिखा *"ख़ुदा उनका मुरब्बी, वो मुरब्बी थे ख़लाइक़ के........ मेरे मौला मेरे हादी थे बेशक शैख़े रब्बानी।"*

     *📚(मर्शिया गंगोही, सफ़ह-1 मतबुआ़ कुतबखाना रहीमिया देवबन्द, तहरीऱ महमूदुल हसन देवबन्दी)*

*तबसरह:-* मुरब्बी का मतलब पालने वाला, तो सोचें देवबंदियों का रशीद अहमद गंगोही के बारे में क्या अक़ीदा है कि वो सबका मुरब्बी, गोया उसे रब्बे काइनात बना दिया ? क्या यह सही तौहीद परस्ती है ? और इसी रशीद अहमद गंगोही का फ़तवा है कि.. 

*सवाल:-* मर्शिया जो ताज़िया वग़ैरह में शहीदाने करबला के पढ़ते हैं, अगर किसी शख़्स के पास हो, वो दूर करना चाहे तो उनकों जला देना मुनासिब है या फ़रोख़्त करना? 

*जवाब:-* उनको जला देना या जमीन में दफ़न करना ज़रूरी है.. 

  *📚(फ़तावा रशीदिया, सफ़ह- 616 तहरीर: रशीद अहमद गंगोही)*
*🔜 इन्शा'अल्लाह पोस्ट कल इसके आगे से होगी।*
        
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