अम्बिया की शान में एक और गुस्ताख़ी 5️⃣A
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*🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
*व हक़ाइक़ 🥀*
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*पोस्ट नम्बर:- 05-A*
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*(16) अम्बिया की शान में एक और गुस्ताख़ी*
*(म'आज़ अल्लाह)*
"और ये यक़ीन जान लेना चाहिए कि हर मख़्लूक़ बड़ा हो या छोटा वो अल्लाह की शान के आगे चमार से भी ज़लील है"
*📚(तक़वीयतुल ईमान मअ़ तज़कीरूल अख़्वान, सफ़ह-19 तहरीर: इस्माईल देहलवी)*
मख़्लूक़ में अम्बिया, औलिया, फ़रिश्ते सब शुमार है तो आप अन्दाज़ा कर लें कि नबियों और वलियों और दूसरे मुक़र्रब बन्दों की शान में किस क़दर गुस्ताख़ी है।
*(17) जिसका नाम मुहम्मद या अली है, वह किसी चीज़ का मुख़्तार नहीं*
*(म'आज़ अल्लाह)*
"जिसका नाम मुहम्मद या अली है वह किसी चीज़ का मुख़्तार नहीं"
*📚(तक़वीयतुल ईमान, सफ़ह- 55, तहरीर: इस्माईल देहलवी)*
मौलवी हुसैन अहमद साहब मदनी देवबन्दी लिखते हैं कि "मक्क-ए मुअ़ज्ज़मा से रवाना होने के बाद चौथे रोज़ जबके कुजै़मा से राबग़ को काफ़िला जा रहा था. रात में ऊँट पर होते हुए ख़्वाब में देखा कि *ज़नाब सरवरे क़ाएनात अलैहिस्सलातु वस्सलाम* तशरीफ़ लाए हैं। मैं उनके क़दमों पर गिर गया। आपने मेरा सर उठाकर फ़रमाया- *क्या माँगता है ?* मैने अर्ज़ किया कि जो किताबें पढ़ चुका हूँ वो याद हो जाएं और जो नहीं पढ़ी हैं उनके समझने की क़ुव्वत हो जाए। तो फ़रमाया कि "तुझको दिया"
*📚 (नक़्श-ए हयात, सफ़ह -96)*
*(18) "हूज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम" बहुत ख़ौफ और दहशत में आ गए*
"मुल्के अरब में *हुज़ूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* एक गंवार की बात सुनकर बहुत खौफ़ और दहशत में आ गए,
*📚(तक़वीयतुल ईमान मअ़ तज़कीरूल अख़्वान, सफ़ह-7 तहरीर: इस्माईल देहलवी)*
इसी तक़वीयतुल ईमान के पुराने एडीशन में लफ़्ज़ खौफ़ की जगह पर बे हवास हो गए, लिखा है।
*📚 (उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद व हक़ाइक़, सफ़ह- 5/6)*
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