मौलवी क़ासिम नानोतवी देवबन्दियों का ख़ुदा 1️⃣0️⃣A
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*🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
*व हक़ाइक़ 🥀*
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*पोस्ट नम्बर:- 10-A*
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*(45) मौलवी क़ासिम नानोतवी देवबन्दियों का ख़ुदा"*
मौलाना हसन साहब बड़े मौकूली थे और किसी को इस मैदान में अपना हम अस्र नहीं समझते थे। एक दिन हज़रत नानोतवी का वाज़ हुआ, और इत्तेफ़ाक़ से सामने वही (मौलवी अहमद हसन) थे और मुख़ातिब बन गए और माकूलात ही के मसाइल का रद शुरू हुआ। वाज़ के बाद उन्होंने कहा-अल्लाहु अकबर ये बातें किसी इन्सानी दिमाग़ की नहीं हो सकतीं, ये तो ख़ुदा ही की बातें हैं।
*📚(अरवाहे सलासा, हिकायत- 245, सफ़ह- 211 तहरीर: अमीर शाह खाँ, क़ारी मुहम्मद तैयब, अशरफ़ अली थानवी)*
*तबसरह:-* यानी मौलवी क़ासिम नानोतवी साहब इन्सान नहीं बल्कि ख़ुदा थे या फ़िर उन पर वही नाज़िल होती थी।
*(46) क़ासिम नानौतवी फ़रिश्ता मुक़र्रब था...*
मौलवी निज़ामुद्दीन ने फ़रमाया कि मैं पच्चीस बरस हज़रत मौलाना नानौतवी की ख़िदमत में हाज़िर हुआ हूँ और कभी बिला वुज़ू नहीं गया। मैंने इन्सानियत से बालादरजा उनको देखा, वह शख़्स एक फ़रिश्ता मुक़र्रब था जो इन्सानों में ज़ाहिर किया गया।"
*📚(अरवाहे सलासा, हिकायत-245, सफ़ह- 211 तहरीर: अमीर शाह खाँ, क़ारी मुहम्मद तैयब, अशरफ़ अली थानवी)*
और दूसरी जगह लिखा कि मौलवी नानौतवी साहब की तमाम ख़सलतें फ़रिश्तों की सी थीं।
*📚(तारीख़े दारूल उलूम देवबंद, सफ़ह- 106)*
*तबसरह:-* लेकिन अम्बिया और औलिया के बारे में ये अक़ीदा, कि औलिया और अंबिया अल्लाह की शान के रूबरू एक ज़र्जए नाचीज़ से भी कमतर हैं? *(अक़ीदह नम्बर- 23)*
*📚 (उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद व हक़ाइक़, सफ़ह- 13/14)*
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