तक़्वीयतुल ईमान मुसलमानों को लड़ाने के लिए लिखी गई 1️⃣1️⃣A
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴
*🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
*व हक़ाइक़ 🥀*
┎━─━─━─━─━─━─━─━┒
*पोस्ट नम्बर:- 11-A*
┖━─━─━─━─━─━─━─━┚
*(49) तक़्वीयतुल ईमान मुसलमानों को लड़ाने के लिए लिखी गई...*
मौलवी इस्माईल देहलवी ने तक़वीयतुल ईमान लिखने के बाद अपने ख़ास-ख़ास लोगों को जमा किया और उनके सामने तक़वीयतुल ईमान पेश की और फ़रमाया कि मैनें ये किताब लिखी है और मैं जानता हूँ कि इसमें बाज़ जगह ज़रा तेज़ अल्फ़ाज़ भी आ गए हैं और बाज़ जगह तशद्दुद भी हो गया मसलन उ़मूर को जो शिर्क ख़फ़ी थे शिर्क जली लिख दिया गया, इन वुजूह से मुझे अन्देशा है कि इसकी इशाअ़त से शोरिश ज़रूर होगी मैंने ये किताब लिख दी, गो इस से शोरिश होगी मगर तवक़्क़ो है कि लड़ भिड़ कर ख़ुद ठीक हो जाएँगे।
*📚(अर्वाहे सलासह, हिकायत-59)*
*तबसरह:-* आप इस की इल्मी बद दियानती पर ग़ौर फ़रमाएं कि शिर्क जली को खफ़ी और खफ़ी को जली लिख दिया हालांकि जली और खफ़ी के लिए शरीअ़त में अलग अहकामात हैं। मसलन अगर इमाम नमाज़े ज़ुहर में क़िरअ़त जली (ऊँची आवाज़ से) करे या फ़जर, मग़रिब और इशा में ख़फ़ी (खामोश) किरअ़त करे तो सज्दा सहव लाज़िम है और जानबूझ कर ऐसा करने से नमाज़ नहीं होती।
*(50) देवबन्दी उलमा की निराली गन्दी आदात,,,*
मौलाना हबीबुर्रहमान ने बयान फ़रमाया कि एक दफ़ा गंगोह की खानकाह में मजमा (भीड़) था।
हज़रत गंगोही और हज़रत नानौतवी तशरीफ़ फ़रमा थे कि हज़रत गंगोही ने हज़रत नानौतवी से मुहब्बत आमेज़ लहज़ा में फ़रमाया कि यहाँ ज़रा लेट जाओ। हज़रत नानौतवी कुछ शर्मा से गए, मगर हज़रत (गंगोही) ने फिर फ़रमाया, तो मौलाना बड़े अदब से चित लेट गये। हज़रत भी उसी चारपाई पर लेट गए और मौलाना की तरफ़ करवट करके अपना हाथ उनके सीने पर पर रख दिया जैसा कि
आशिक़ सादिक़ *(सच्चा आशिक़)* अपने क़ल्ब को तसकीन दिया करता है मौलाना (नानौतवी) हरचन्द फ़रमाते हैं कि मियाँ क्या कर रहे हो, ये लोग क्या कहेंगे। हज़रत ने फ़रमाया कि लोग कहेंगे तो कहने दो....
*📚 (अर्वाहे सलासा, हिकायत-305, सफ़ह- 248, तहरीर: अमीर शाह खाँ, कारी मुहम्मद तैयब, अशरफ़ अली थानवी)*
*तबसरह:-* ये लोन्डेबाजी नहीं तो और क्या है ? और ये इतना ख़तरनाक फेले बद (बुरा काम) है जिससे इन्सान तो इन्सान, शैतान भी ख़ौफ खाता है, चुनाँचे *हज़रते सैयदना इब्ने अब्बास रदिअल्लाहु अन्हु* का बयान है कि जब मर्द, मर्द पर सवार होता है तो शैतान इस खौफ़ से भाग जाता है कि कहीं ये लानत उस पर न आ जाए।
*📚 (उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद व हक़ाइक़, सफ़ह- 15/16)*
*📍नोट:-* आप सभी हमारी इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करने की कोशिश करें *और याद रहे पोस्ट में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बिल्कुल भी न करें..!*
*📍नोट:-* अगर आप चाहते हैं कि हमारी नये नये उन्वान पर नई नई पोस्ट आपको मिलती रहें तो हमारे वाट्सप ग्रुप की लिंक पर क्लिक करें और जल्द ही एड हो जाएं👇🏻
👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
https://chat.whatsapp.com/BlTnmJKrHakLQ0Y3Q9Q1KC
Comments
Post a Comment