देवबन्दी उलेमा रंडियों के पीर और रन्डियों से उनकी मोहब्बत1️⃣4️⃣

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         *🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
                           *व हक़ाइक़ 🥀*


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                  *पोस्ट नम्बर:- 14*
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          *بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْـمٰـنِ الرَّحِـيْـمِ*

*اَلصَّــلٰـوةُ وَالسَّــلَامُ عَــلَـيْـكَ يَا رَسُــوْلَ اللّٰه ﷺ*

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         *उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
                           *व हक़ाइक़*

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                  *पोस्ट नम्बर:- 1️⃣4️⃣*
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*(57) देवबन्दी उलेमा रंडियों के पीर और रन्डियों से उनकी मोहब्बत* 

    "(रशीद अहमद गंगोही ने) एक बार इरशाद फ़रमाया कि ज़ामिन अली जलालाबादी की सहारनपुर में बहुत रन्डियाँ मुरीद थीं। एक बार ये सहारनपुर में किसी रन्डी (तवायफ़) के मकान में ठहरे हुए थे। सब मुरीदनियाँ अपने मियाँ साहब की ज़ियारत के लिये हाज़िर हुईं। मगर एक रन्डी नहीं आई। मियाँ साहब बोले कि फ़लानी क्यूँ नहीं आई (पीर साहब को एक-एक रन्डी की ख़बर थी) रन्डियों ने जबाब दिया कि मियाँ साहब हमने उसे बहुतेरा कहा कि चल, मियाँ साहब की ज़ियारत को, उसने कहा-मैं बहुत गुनाहगार हूँ, मियाँ साहब को क्या मुँह दिखाउँगी मैं ज़ियारत के काबिल नहीं। मियाँ साहब ने कहा- नहीं जी "तुम उसे हमारे पास ज़रूर लाना" चुनाँचे रन्डियाँ उसे लेकर आई, जब वह सामने आई तो मियाँ साहब ने पूछा- बी तुम क्यूँ नहीं आईं थीं ? उसने कहा-हज़रत रूसियाही की वजह से जियारत को आती हुई शरमाती हूँ। मियाँ साहब बोले बी तुम क्यूँ शरमाती हो, करने वाला कौन और कराने वाला कौन वह तो वही है *(यानी अल्लाह तआ़ला)* रण्डी ये सुनकर आग हो गई और ख़फा होकर कहा *"ला हौला वला क़ुव्वता"* अगरचे, मैं रूसियाह और गुनाहगार हूँ मगर ऐसे पीर के मुँह पर पेशाब भी नहीं करती। मियाँ साहब तो शर्मिन्दा होकर सर निगूँ रह गये और वह उठकर चल दी।

*📚(तज़किरतुर्रशीद, जिल्द-2, सफ़ह-242)* 

*तबसरह:-* उलमा ए देवबन्द के पीरों की करतूत ऐसी है तो आम अवाम का क्या हाल होगा? 
इससे आप इनके मौलवियों के ज़ाहिर और बातिन का अन्दाज़ा लगा सकते हैं कि ये अक़ाइद में ही नहीं, आमाल में भी दोगले हैं। हाथी के दाँत खाने के और, और दिखाने के और।"

*(58) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम राह से भटके हुए*

 और पाया तुझको (नबी-ए करीम को) भटकता, फिर राह समझाई,,
 
*📚(तर्जुमा क़ुरआन, सूरह वद्दुहा, आयत- 7, अज़: महमूदुल हसन देवबन्दी)*

      *तब्सरह:-* देखिए अक़ीदा नं. 42)

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