रशीद अहमद गंगोही कमालात में ईसा अलैहिस्सलाम से आगे थे1️⃣4️⃣A

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         *🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
                           *व हक़ाइक़ 🥀*


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                  *पोस्ट नम्बर:- 14-A*
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*(59) रशीद अहमद गंगोही कमालात में ईसा अलैहिस्सलाम से आगे थे,*

महमूदुल हसन देवबन्दी, रशीद अहमद गंगोही के बारे में लिखता है कि "मुर्दों को ज़िन्दा किया और जिन्दों को मरने न दिया इस मसीहाई को देखें इब्ने मरियम... 

   *📚(मर्शिया गंगोही, सफ़ह- 23, मतबुआ़ कुतुबखाना रहीमिया देवबन्द तहरीर: महमूदुल हसन देवबन्दी)*

*तबसरह:-* इस शेर में महमूदुल हसन देवबन्दी ने इब्ने मरियम हज़रते ईसा अलैहिस्सलाम को रशीद अहमद गंगोही की मसीहाई को दिखाते हुए फ़रमाया है, कि ऐ इब्ने मरियम तुमने सिर्फ़ एक काम किए और हमारे रशीद अहमद ने दो काम किए मुर्दों को जिन्दा भी किया और ज़िन्दों को मरने नहीं दिया। मआज़-अल्लाह किस क़दर गुस्ताख़ी है, हज़रते ईसा अलैहिस्सलाम की शान में।

*(60) गंगोही ख़ुदा की मिस्ल या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मिस्ल,*

  "ज़बान पर अहला अहवा की है क्यूँ ऊल बुबूल शायद उठा आलम से कोई बानी इस्लाम का सानी"

     *📚(मर्शिया गंगोही, सफ़ह-5, तहरीर : महमूदुल हसन देवबन्दी)*

*तबसरह:-* इस शेर में मौलवी महमूदुल हसन ने रशीद अहमद गंगोही को बानी इस्लाम का सानी (मिस्ल या दूसरा इस्लाम का (Founder) लिखा है और ये भी कहा है कि उनकी मौत के वक़्त ऊल बुबूल के नारे बुलन्द हुए। अब ग़ौर तलब बात ये है कि देवबन्दी मज़हब में बानी इस्लाम अल्लाह तआ़ला है, जैसा कि अशरफ़ अली थानवी ने अपने वाज़ ज़िक्ररुर्रसूल मतबुआ़ कानपुर, सफ़ह 22 पर लिखा है कि बानी इस्लाम ख़ुदाए तआ़ला है तो मालूम हुआ कि देवबन्दियों के नज़दीक रशीद अहमद गंगोही ख़ुदा की मिस्ल है और थानवी से इख़्तिलाफ़ करके बानीए इस्लाम से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुराद लें तो गंगोही जी कम-अज़ कम दूसरे रसूल हुए या मिस्ल रसूल हुए।

*(61) गंगोही की क़ब्र मिस्ले तूर है और वह ख़ुद ख़ुदा है,* 

महमूदुल हसन देवबन्दी, रशीद अहमद गंगोही के बारे में लिखता है "तुम्हारी तुर्बते अनवर को देकर तूर से तशवीह, कहूँ हूँ बार-बारानी मेरी देखी भी नादानी" 

     *📚(मर्शिया गंगोही, सफ़ह-13, तहरीर: महमूदुल हसन देवबन्दी)*

*तबसरह:-* महमूदुल हसन देवबन्दी ने जब रशीद अहमद गंगोही को मुरब्बी-ए-खलाइक़ माना ओर बानिए इस्लाम का सानी कहा तो उनकी क़ब्र को तूर से तशबीह देकर खुद अरनी कहने वाला मूसा बने और गंगोही को ख़ुदा बनाया।
 
  *📚 (उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद व हक़ाइक़, सफ़ह- 18/19)*

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