गंगोही और शैखैन के अलक़ाब* 1️⃣5️⃣A
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*🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
*व हक़ाइक़ 🥀*
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*पोस्ट नम्बर:- 15-A*
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*(66) गंगोही और शैखैन के अलक़ाब*
महमूदुल हसन देवबन्दी गंगोही के बारे में लिखता है- वो सिद्दीक़ और फ़ारूक़ कैसे अजब क्या है... शहादत ने तहज्जुद में क़दम बोशी की गर ठानी"
*📚(मर्शिया गंगोही, सफ़ह-12)*
*तबसरह:-* सिद्दीक़ और फ़ारूक़ हज़रात शैखैन रदिअल्लाहु तआ़ला अन्हुम के वो मख़्सूस अलक़ाब हैं जो अल्लाह तआ़ला और उसके *हबीब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* ने उनको अता फ़रमाए, और हज़रते अली रदिअल्लाहु अन्हु तहज्जुद की नमाज़ में शहीद हुए थे। और महमूदुल हसन देवबन्दी सिद्दीक़ो-फ़ारूक़ और हज़रते अली की शहादत ने तहज्जुद में उनकी क़दम बोशी की, को गंगोही की तरफ़ मन्सूब करता है..
*(67) हिदायत सिर्फ गंगोही के दर से मिलती है,*
*(म'आज़ अल्लाह)*
महमूदुल हसन देवबन्दी, गंगोही के बारे में लिखता है कि-"हिदायत जिसने ढूँढी दूसरी जगह, हुआ गुमराह... वह मीजाबे हिदायत थे कहै क्या नस्से, क़ुरआनी"
*📚(मर्शिया गंगोही, सफ़ह-9)*
*तबसरह:*👉🏻 यानी जिसने गंगोही के आसताने को छोड़कर किसी और जगह हिदायत ढूँढी वह गुमराह हो गया क्यूँकिं गंगोही जी नस्से क़ुरआनी (क़ुरआन पाक की आयात) से हिदायत के परनाले थे। क्या देवबन्दी क़ुरआन पाक की कोई ऐसी आयत दिखा सकते हैं जिसमें गंगोही साहब के बारे में ऐसी बात लिखी हो?
*📚 (उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद व हक़ाइक़, सफ़ह- 20/21)*
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