औलिया अल्लाह की तौहीन, 1️⃣6️⃣

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         *🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
                           *व हक़ाइक़ 🥀*


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                  *पोस्ट नम्बर:- 16*
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*(68) औलिया अल्लाह की तौहीन,*

        मर्शिया गंगोही में मज़ीद लिखा है- "रक़ाबे औलिया क्यूँ ख़म न होतीं आपके आगे....यह शहबाज़े तरीक़त थे मुहीउद्दीने जीलानी"
 
         *📚(मर्शिया गंगोही, सफ़ह- 9)*

  *तबसरह:-* यानी जिस तरह हुज़ूर ग़ौसे आज़म रदिअल्लाहु तआ़ला अन्हु के हुज़ूर तमाम औलियाए वक़्त ने अपनी गरदने ख़म की थीं उसी तरह गंगोही चूंकि मुहीउद्दीन जीलानी थे, तो उनके आगे औलिया की गरदने क्यूँ न ख़म होतीं। आपने मर्शिया गंगोही में देखा कि, गंगोही को नबी-ए पाक, हज़रते ईसा, हज़रते युसूफ़ और हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम और हुज़ूर ग़ौसे आज़म के बराबर करने की कोशिश की गई !

*(69) मदरसा देवबन्द अंग्रेज की पसन्द,*

       13 जनवरी 1875 इस्वी लेफ्टिनेन्ट गवर्नर के एक ख़ूफ़िया मोतमिद अंग्रेज़ मुसम्मी पामर ने मदरसा देवबन्द का मुआयना किया और मुआयना करने के बाद कहा जो काम बड़े-बड़े कॉलेजों में हजारों रूपये के सर्फ़ से होता है वह यहाँ कौड़ियों में हो रहा है, जो काम प्रिसिंपल हजारों रूपयों में महाना तनख़्वाह लेकर करता है वह यहाँ एक मौलवी, चालीस रूपए माहाना पर कर रहा है ये मदरसा ख़िलाफ़े सरकार नहीं बल्कि, मुआ़फ़िक़े सरकार, मम्दूव व मुआ़विने सरकार है"
 
 *📚(सवानेह हयात मौलाना मुहम्मद अहसन नानौतवी, सफ़ह- 217, मतबुआ़ मकतबा उसमानिया कराची)*

   *तबसरह:-* ख़ुद अंग्रेज की ये शहादत है कि ये मदरसा खिलाफ़े सरकार नहीं। अब आप इन्साफ़ कीजिए कि उस बयान के सामने अब अफ़साने की क्या हक़ीक़त है, जिसका ढिन्ढोरा पीटा जाता है, कि मदरसा देवबन्द अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ़ सियासी सरगर्मियों का बहुत बड़ा अड्डा था।

*(70) सब क़ब्रो से अफ़ज़ल, क़ब्र अशरफ़ अली थानवी की है।*

   सब क़ब्रों से अफ़ज़ल क़ब्र (अशरफ़ क़ब्र) वह क़ब्र है जो हज़रत अशरफ़ अली थानवी की लाश को अपने अन्दर लिए हुए है जो दीने ईलाही के मुजद्दिद थे, क्या कोई उनका हमसर..."
 
  *📚(अशरफ़ुल सवानेह, जिल्द- 4, सफ़ह- 189, मतबुआ़ इदारा तालीफ़ाते अशरफ़िया मुल्तान, तहरीर: ख्वाजा अज़ीजुल हसन मौलवी व अब्दुल हक़)*

 *तबसरह:-* अस्तग़फिरूल्लाह! ये नादान अंबिया सहाबा और औलिया की कब्रों से भी अफ़ज़ल थानवी की क़ब्र मान रहा है।

*(71) मदरसा देवबन्द अंग्रेज के एजेन्ट,*

"मदरसा देवबन्द के कारकुनों में अकसरियत ऐसे बुजुर्गों की थी, जो गवर्नमेन्ट के क़दीम और हाल पेंशनर्स थे जिनके बारे में गवर्नमेन्ट को शक व शुबह करने की कोई गुन्जाइश ही न थी।"
 
    *📚(हाशिया सवानेह क़ासमी, जिल्द-2, सफ़ह- 247, मतबुआ़ मकतबा रहमानिया लाहौर, तहरीर: मनाज़िर अहसन ग़िलानी)*

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