हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, अशरफ़ अली थानवी की शक्ल में*1️⃣8️⃣A

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴

          

         *🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
                           *व हक़ाइक़ 🥀*


                ┎━─━─━─━─━─━─━─━┒
                  *पोस्ट नम्बर:- 18-A*
          ┖━─━─━─━─━─━─━─━┚


*(83) हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, अशरफ़ अली थानवी की शक्ल में*

                    *(म'आज़ अल्लाह)*

    मौलवी नज़ीर अहमद केरालवी अपना ख़्वाब बयान करता है "हुज़ूर आक़ा-ए नामदार सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को ख़्वाब में अशरफ़ अली की शक्ल में देखा, और हुज़ूर सियाह अचकन बटनों वाली जैब तन फ़रमाये हुए थे, जैसा अशरफ़ अली थानवी गाहे-गाहे सियाह अचकन पहनते हैं।

 *📚(असदक़ुल रूया, जिल्द- 2, सफ़ह- 2)*

   (अइज़्ज़ा) मुबारकपुर में जब था तो मैंने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को आप (अशरफ़ अली थानवी) की सूरत में देखा, फ़क़त ज़ियारत हुई। कोई बातचीत की दौलत नसीब नहीं हुई... 

 *📚(असदक़ुल रूया, ज़िल्द- 2, सफ़ह- 15)* 

 (अइज़्ज़ा) इस ख़्वाब से पहले तीन मर्तबा ख़्वाब देखा और तीनों मर्तबा हमारे मौलाना अशरफ़ अली थानवी की शक्ल में *हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* नज़र आये। मैंने तीनों मर्तबा मुसाफ़ह किया मगर हुज़ूर बोले नहीं। 

 *📚(असदक़ुल रूया, जिल्द- 2, सफ़ह- 25)*

      (अइज़्ज़ा) एक और साहब अपना ख़्वाब लिखकर कहते हैं- "इस ख़्वाब से पहले तीन मर्तबा ख़्वाब देखे और तीनों मर्तबा हमारे मौलाना अशरफ़ अली की शक्ल में *हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* नज़र आये। मैने तीनों मर्तबा मुसाफ़ह किया, मगर हुज़ूर बोले नहीं.. 

*📚 (असदक़ुल रूया, जिल्द- 2, सफ़ह- 37)*

*तबसरह:👉🏻* इन्साफ़ कीजिए इन झूठे और मनगढ़ंत ख़्वाबों के शाया करने का मतलब क्या है? *(म'आज़ अल्लाह)* असल में मुरीदों के ज़हनों में बिठाना मक़सूद है कि थानवी को देखना गोया *हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* को देखना है और ये आक़ा-ए दो जहाँ की शान में बहुत बड़ी गुस्ताख़ी है।

*(84) मदीना पाक थाना भवन है..*

                     *(म'आज़ अल्लाह)*

   जैसा कि मदीना शरीफ़ में (जैसा वैसा नहीं रह सकता) रहकर मैल कुचैल वाला नहीं रह सकता अल्लाह का शुक्र है हज़रत हाजी साहब की बरकत से ऐसा वैसा यहाँ नहीं रह सकता" 

    *📚(अलअफ़ाज़ात अल यौमिया-अज़ अशरफ़ अली थानवी)*

*नोट:👉🏻* थाना भवन वह जगह है जहाँ अशरफ़ अली थानवी रहता था।
 
  *📚 (उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद व हक़ाइक़, सफ़ह- 24/25)*

*📍नोट:-* आप सभी हमारी इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करने की कोशिश करें *और याद रहे पोस्ट में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बिल्कुल भी न करें..!*

*📍नोट:-* अगर आप चाहते हैं कि हमारी नये नये उन्वान पर नई नई पोस्ट आपको मिलती रहें तो हमारे वाट्सप ग्रुप की लिंक पर क्लिक करें और जल्द ही एड हो जाएं👇🏻
     

👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
https://chat.whatsapp.com/BlTnmJKrHakLQ0Y3Q9Q1KC

Comments

Popular posts from this blog

उलेमा ए देओबन्द की वो गुस्ताखी थी जिसकी वजह से उनपर 33 उलेमा ए हरमैन ने कुफ्र का फतवा दिया

देवबन्दियों का तबरी2️⃣3️⃣

Kya Auliya ALLAH Gaib Jante Hai Aur Jo Dil Me Kya Wo Bhi Jante Hai*