गंगोही और नानौतवी मियाँ बीबी1️⃣9️⃣A

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         *🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
                           *व हक़ाइक़ 🥀*


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                  *पोस्ट नम्बर:- 19-A*
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*(87) गंगोही और नानौतवी मियाँ बीबी.."*

   ख़लीफ़ा थानवी मौलवी आशिक़ इलाही मेरठी लिखते हैं- "आप (यानी रशीद अहमद गंगोही) एक मर्तबा ख़्वाब बयान करते हैं कि मौलवी क़ासिम नानौतवी अरूस (दुल्हन) की सूरत में हैं और मेरा उनसे निकाह हुआ है। जिस तरह जन व शौहर (मियाँ बीबी) में एक को दूसरे से फ़ायदा पहुँचता है। उसी तरह मुझे उनसे और उन्हें मुझसे फ़ायदा पहुँचा है। फ़िर खुद ही ताबीर फ़रमाई कि आख़िर उनके बच्चों की किफ़ालत करता हूँ... 

   *📚(तज़किरतुल रशीद, जिल्द- 2, सफ़ह- 289 तहरीर: आशिक़ इलाही मेरठी)*

    गंगोही का वह सिर्फ़ ख़्याल नहीं बल्कि पुख़्ता ख़्याल था, ये मौलवी अशरफ़ अली थानवी से पूछिये। वो फ़रमाते हैं कि अकसर ये देखा गया है कि दिन में जिस बात का ख़्याल ज़्यादह तर बसा रहता है वही रात में ख़्वाब की शक्ल में नज़र आती है, ख़्याल ही तो था जो बिन्द गया चुनाँचे ख़्वाब के मुताल्लिक़ थानवी साहब फ़रमाते हैं कि हमारे ख़्वाब की हक़ीक़त तो अकसर ये होती है कि दिन भर हमारे ख़्यालात में जो दिमाग़ में बसे हुए रहते हैं वही रात को सोते में उसी सूरत में या किसी दूसरी सूरत में नज़र आ जाते हैं। 

  *📚(अल इफ़ाज़ात अल योमिया, जिल्द-5, सफ़ह- 55)*

 हमने ऊपर गंगोही साहब का ख़्वाब फ़िर ख़्याल बयान किया तो अब वह वाक़िया पेश करते हैं तो ख़्वाब व ख़्याल था ऐनुल यक़ीन हो गया, गोया वह ख़्वाब जो गंगोही की ऐन मुराद बनकर भरे मजमें में दनदनाता हुआ तशरीफ़ लाया। चुनाँचें "मौलाना हबीबुर्रहमान ने बयान फ़रमाया कि एक दफ़ा गंगोही की ख़ानकाह में मजमा था, हज़रत नानौतवी तशरीफ़ फ़रमा थे, कि हज़रत गंगोही ने हज़रत नानौतवी से मुहब्बत आमेज़ लहजे में फ़रमाया कि यहाँ ज़रा लेट जाओ। हज़रत नानौतवी कुछ शरमा से गए मगर हज़रत (गंगोही) ने फ़िर फ़रमाया तो मौलाना बहुत अदब के साथ चित लेट गए। हज़रत भी उसी चारपाई पर लेट गए और मौलाना की तरफ़ करवट करके अपना हाथ उनके सीने पर रख दिया जैसा कि आशिक़े सादिक़ अपने क़ल्ब (दिल) को तसकीन दिया करता है। मौलाना नानौतवी हरचन्द फ़रमाते रहे मियाँ ये क्या कर रहे हो, ये लोग क्या कहेंगे। हज़रत ने फ़रमाया कि लोग कहेंगे, तो कहने दो" 

     *📚(अरवाहे सलासा, हिकायत- 305, सफ़ह- 248 तहरीर: अमीर शाह कारी, मुहम्मद तैयब, अशरफ़ अली थानवी)*

*तबसरह:-* क्या इन्हें रात-दिन हम जिस्म परस्ती के ख़्याल ही आते रहते थे ? हालाँकि ये इतना ख़तरनाक फैले बद (बुरा काम) है जिससे इन्सान तो इन्सान, शैतान भी ख़ौफ खाता है। चुनाँचे हज़रते सैयदना इब्ने अब्बास रदिअल्लाहु अन्हु का बयान है कि जब मर्द, मर्द पर सवार होता है तो शैतान इस ख़ौफ से भाग जाता है कि कहीं ये लानत उस पर न आ जाए।
 
  *📚 (उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद व हक़ाइक़, सफ़ह- 25/26)*

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