ज़ियारते शैख़, ज़ियारते नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम2️⃣4️⃣

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         *🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
                           *व हक़ाइक़ 🥀*


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                  *पोस्ट नम्बर:- 24*
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*(103) ज़ियारते शैख़, ज़ियारते नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम...*

     “जिन्होंने हज़रत शैख़ (इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की रह.) को देखा, गोया उन्होंने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा, और जिन्होंने मौलाना से हदीस पढ़ी गोया उन्होंने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पढ़ी।" 

*📚(कससुल अबकार, सफ़ह-100 मतबुआ़ इदारा तालीफ़ाते अशरफ़िया तहरीर :- अशरफ़ अली थानवी)* बिला तब्सरह। 

*(104) तबलीग़ी जमाअ़त के कारकुनो का मकाम...*

      तबलीग़ी जमाअ़त के बानी मौलवी इलियास साहब तबलीग़ी जमाअ़त के कारकुनो का अम्बिया अलैहिमुस्सलाम से मुआज़ना करते हुए लिखते हैं "अगर हक़ तआ़ला किसी को लेना नहीं चाहते तो चाहे अंबिया अलैहिमुस्सलाम भी कितनी ही कोशिश करें तब भी ज़र्रा नहीं हिल सकता, और करना चाहे तो तुम जैसे ज़ईफ़ (कमज़ोर/बूढ़ा) से वो काम ले लें जो अंबिया अलैहिमुस्सलाम से भी न हो सके। 

*📚(मकातिबे इलियास, सफ़ह-107, तहरीर: मौलवी इलियास)*

*(105) मौलवी इलियास मिस्ल अंबिया अलैहिमुस्सलाम*

"कुनतुम खै़र उम्मत की तफ़सीर... ख़्वाब में इलक़ा हुई कि तुम मिस्ल अंबिया अलैहिमुस्सलाम, लोगों के वास्ते ज़ाहिर किये गये हो" 

    *📚(अलमलफ़ुज़ाते इलियास, सफ़ह-51, तहरीर: मौलवी इलियास)*

*(106) नबी-ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर इल्ज़ाम तराशी*

 "और क़ब्ल अलदखूल (आपस में हम बिस्तरी से पहले) तलाक़ दो तो उस औरत पर इद्दत लाज़िम न होगी जैसा कि जै़नब को तलाक़ अलदखूल दी गई और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे बिला इद्दत निकाह कर लिया.... 

  *📚(बलग़तुल हैरान, सफ़ह- 267, तहरीर: मौलवी हुसैन अली)* 

*तबसरह:👉🏻* ये रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़ाते बरकात पर इल्ज़ाम तराशी करते हुए संगीन गुस्ताख़ी का मुर्तकिब हुआ है। हालाँकि हदीस शरीफ़ में है- "हज़रते अनस रदिअल्लाहु अन्हु ने फ़रमाया कि जब हज़रते जै़नब रदिअल्लाहु तआ़ला अन्हा की इद्दत पूरी हो गई तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रते जै़द रदिअल्लाहु तआ़ला अन्हु से फ़रमाया कि तुम जै़नब को मेरी तरफ़ से निकाह का पैग़ाम दो *(सहीह मुस्लिम शरीफ़)* हदीस शरीफ़ की रौशनी में मालूम हुआ कि देवबंदी मौलवी तो इमामुल अम्बिया पर भी इलज़ाम तराशी से बाज़ नहीं आते।

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