देवबंदी धरम में हिन्दुओं वाले नाम रखना जाइज़ है*2️⃣6️⃣

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         *🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
                           *व हक़ाइक़ 🥀*


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                  *पोस्ट नम्बर:- 26*
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*(110) देवबंदी धरम में हिन्दुओं वाले नाम रखना जाइज़ है*

   मौलवी अताउल्ला बुख़ारी ने दीनाजपुर जेल में पंडित कृपाराम ब्रह्मचारी ज़ाहिर किया और इस नाम से अपने अहबाब को ख़त लिखे "

   *📚(अताउल्ला शाह बुख़ारी सफ़ह - 37)* 

सुनों मैं (अहमद अली लाहौरी) कहता हूँ कि अगर तुम अपना नाम माधौसिंह गंगाराम रखवाओ, नमाज़ पंजगाना अदा करो, ज़कात पाई-पाई गिनकर दो, हज फर्ज़ है तो करके आओ और पूरे रमज़ान के तीसों रोज़े रखो तो मैं फ़तवा देता हूँ कि तुम पक्के मुसलमान हो। 

  *(खुद्दामुद्दीन लाहौरी 22 फ़रवरी 1964 ई.)*

*(111) नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की निस्बत से नाम रखना शिर्क*

   "अब्दुन्नबी अब्दुर्रसूल अली बख़्श, हुसैन बख़्श नाम रखना शिर्क है।
 
      *📚(बहिश्ती जे़वर, सफ़ह-145, अज़ अशरफ़ अली थानवी)*

*(112) अवाम का एतक़ाद या गधे का उज़्व मख़सूस*

 "अवाम के एतक़ाद के लिए कमालात के इज़हार पर हज़रत मौलाना मोहम्मद याक़ूब साहब इस एतक़ाद की एक मिसाल बयान फ़रमाया करते थे। है तो फ़हिश मगर बिलकुल चस्पाँ फ़रमाया करते कि अवाम के अक़ीदे की बिल्कुल ऐसी हालत है जैसे गधे का अज़ुए मख़्सूस बढ़े तो बढ़ता ही चला जाये और जब ग़ायब हो तो बिल्कुल ही नहीं वाक़ई अजीब मिसाल है" 

  *📚(मलफ़ूज़ात हक़ीमुल उम्मत, जिल्द-3, सफ़ह-255, अशरफ़ अली थानवी)*

*(113) और जब इस्तिन्जा के ढेले सोना बन गये*

फ़रमाया कि शाह अब्दुर्रज़्ज़ाक साहब झुन्झानवी के साहबज़ादे को कीमिया का शौक़ था एक मर्तबा शाह साहब इस्तिन्जा फ़रमा रहे थे और ये साहबज़ादे कुछ दवाईयाँ कीमिया की लिए हुये खड़े थे। बाद फ़राग़े ढेला पत्थर पर मारा, पत्थर सोना हो गया। एक सुनार उसमें से कुछ काटकर ले गया, फ़िर शाह साहब ने फ़रमाया कि भाई अगर कोई इसको काटकर ले गया तो नमाज़ियों को तकलीफ़ होगी फिर दुआ की वह पत्थर हो गया ...

 *📚(मलफ़ुज़ात हकीमुल उम्मत, जिल्द-18, सफ़ह- 136, अशरफ़ अली थानवी)*

*(114) काॅलेजों में मीलादुन्नबी वाजिब और बाक़ी जगह बिदअ़त* 

  मौलूद शरीफ़ (यानी मीलादुन्नबी) और जगह तो बिदअ़त है मगर-कालेज में जाइज़ बल्कि वाजिब है क्यूँकि इस बहाने से वो कभी रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का ज़िक्र शरीफ़ और आपके फ़ज़ाइल व मोज़िजात सुन लेते हैं तो अच्छा है। इसी तरह हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की अज़मत व मुहब्बत उनके दिलों में क़ायम रहे।

 *📚(मलफ़ुज़ाते हकीमुल उम्मत, जिल्द-21, सफ़ह-326 अशरफ़ अली थानवी)*

  *📚 (उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद व हक़ाइक़, सफ़ह- 32/33)*

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