औरतों की फ़रज (छोटे पेशाब वाली जगह) मीठी थी न कड़वी-देवबन्दिओं के रँगीन मिजाज़ हकीमुल उम्मत2️⃣7️⃣
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*🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
*व हक़ाइक़ 🥀*
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*पोस्ट नम्बर:- 27*
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*(115) औरतों की फ़रज (छोटे पेशाब वाली जगह) मीठी थी न कड़वी-देवबन्दिओं के रँगीन मिजाज़ हकीमुल उम्मत*
एक सिलसिलए गुफ़्तगू में मौलवी थानवी साहब ने फ़रमाया-मकतब के लड़कों ने हाफिज़ जी को निकाह की तरग़ीब दी, कि हाफ़िज़ जी निकाह कर लो बड़ा मज़ा है। हाफ़िज़ जी ने कोशिश करके निकाह किया और रात भर रोटी (फ़रज के साथ) लगा- लगाकर खाई। मज़ा क्या ख़ाक आता ? सुबह लड़कों पर खफ़ा होते हुए आये कि सारे कहते थे कि बड़ा मज़ा है, हमने रोटी लगाकर खाई तो न नमकीन मालूम हुई न मीठी न कड़वी। लड़कों ने कहा-हाफ़िज़ जी मारा करते हैं। आई शब् हाफ़िज़ जी बेचारी को ख़ूब ज़दो-कूब किया, दे जूता-दे जूता। तमाम मुहल्ला जाग उठा और जमा हो गया और हाफ़िज़ जी को बुरा-भला कहा। फ़िर सुबह को आये और कहने लगे सिर्रों ने दिक कर दिया। रात हमने मारा भी कुछ मज़ा न आया और रुसवाई भी हुई। तब लड़कों ने खोलकर हक़ीक़त बयान की, के मारने से ये मुराद है "अब जो शब आई तब हाफ़िज़ जी को हक़ीक़त मुन्कशिफ़ हुई। सुबह जो आये तो मूँछ का एक एक बाल ख़िल रहा था और ख़ुशी में भरे हुए थे।
*📚(मलफ़ुज़ाते हकीमुल उम्मत, जिल्द- 6, सफ़ह- 121)*
*(116) हिन्दू ग्यारहवीं दे तो सुन्नत और मुसलमान दे तो गुनाह*
अशरफ़ अली थानवी साहब ने फ़रमाया कानपुर में एक हिन्दू ग्यारहवीं देता था। मुझसे एक आदमी ने पूछा, मैनें कहा- इसके लिए जाइज़ है। उसकी ग्यारहवीं पर फ़ातिहा दिलाया करो, मुसलमान के लिए तो गुनाह है और उसके लिए सुन्नत है। एक शख़्स की एक बात बड़ी पसंद आई उसने कहा मौलूद शरीफ़ (मीलादुन्नबी) देवबंद और थाना भवन में बिदअ़त है और अलीगढ़ काॅलेज में इबादत है।
*📚(मलफ़ुज़ाते हकीमुल उम्मत, जिल्द-15, सफ़ह- 182, अज़- अशरफ़ अली थानवी)*
*(117) क़ुरआन पर पेशाब अच्छा ख़्वाब है। अल्लाह तुझे बेटा देगा*
एक शख़्स मौलाना शाह अब्दुल अज़ीज़ के पास रोते हुए आये। हज़रत ने फ़रमाया क्या बात है? उसने कहा मैनें ऐसा ख़्वाब देखा कि मुझे अंदेशा है कि मेरा ईमान न जाता रहे। हज़रत ने फ़रमाया बयान तो करो ! उन साहब ने कहा मैंने देखा कि क़ुरआन पर पेशाब कर रहा हूँ। हज़रत ने फ़रमाया ये तो बहुत अच्छा ख़्वाब है तुम्हारे लड़का पैदा होगा और हाफ़िज़ होगा।
*📚(मलफ़ुज़ाते हकीमुल उम्मत, जिल्द-15, सफ़ह- 182, अज़- अशरफ़ अली थानवी)*
*(118) सफ़ेद झूठ__!*
"अकाबिर की हक़ परस्ती के ज़ेरे उन्वान लिखते हैं "फ़रमाया हज़रत मौलाना गंगोही ने एक बार मौलवी याहया साहब से फ़रमाया कि बरेली से जो रिसाला आये हैं वह मुझको सुनाना ताकि जो बात हमारे अन्दर ग़लती की हैं, उससे रूज़ू कर लें। उन्होंने कहा उनमें गालियों के सिवा क्या है ? इससे अन्दाज़ा हो सकता है हमारी हक़ परस्ती का, कि अपने दुश्मन के सही क़ौल को क़ुबूल करने को तैयार हैं।
*📚(मलफ़ुज़ाते हकीमुल उम्मत, जिल्द- 14, सफ़ह- 146, अज़- अशरफ़ अली थानवी)*
*तबसरह:👉🏻* जबसे देवबंदियों ने ये गुस्ताख़ाना किताबें लिखी हैं, उलमा ए अहले सुन्नत उनके वाहियात अक़ाइद को बयान करके उन्हें समझा रहे हैं। लेकिन उन्होंने किसी एक अक़ीदे से भी रूज़ू (तौबा) नहीं किया बल्कि अपने उलमा के ग़लत अक़ाइद के तहफ़्फ़ुज़ में सफ़हों के सफ़हे काले कर दिए और आला हज़रत को वहाबियों, देवबंदियों के ग़लत अक़ाइद की निशानदही पर अल शहाबुल साक़िब में मौलवी हुसैन अहमद मदनी ने 6000 से ज़्यादा गालियाँ देकर गालियों का आलमी रिकार्ड क़ायम किया। ख़ुदा महफ़ूज़ रखे हर बला से ख़ुसूसन वहाबियों की इस वबा से।
*📚 (उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद व हक़ाइक़, सफ़ह- 33/34)*
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