मुनाफ़िकों की चन्द निशानियाँ2️⃣8️⃣

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         *🥀 उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद*
                           *व हक़ाइक़ 🥀*


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                  *पोस्ट नम्बर:- 28* ┖━─━─━─━─━─━─━─━┚


*_मुनाफ़िकों की चन्द निशानियाँ_!*

 हुज़ूर नबीये अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम माले ग़नीमत तकसीम फ़रमा रहे थे। तो ज़ुलख़ुवैसरा ने कहा या रसूलुल्लाह! अद्ल कीजिए। हुज़ूर ने फ़रमाया- तुझे ख़राबी हो, मैं न अद्ल करूगाँ तो अद्ल कौन करेगा? हज़रत उमर रदिअल्लाहु तआ़ला अन्हु ने अर्ज़ किया- मुझे इजाज़त दीजिए कि इस मुनाफ़िक़ की गर्दन मार दूँ। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि इसे छोड़ दो। इसके और भी हमराही हैं कि तुम उनकी नमाज़ों के सामने अपनी नमाज़ों को और इनके रोज़ों के सामने अपने रोज़ों को हक़ीर देखोगे वो क़ुरआन पढ़ेगें और इनके गलों से न उतरेगा, वो दीन से ऐसे निकल जाएगें जैसे तीर शिकार से। 
*📚(सहीह बुख़ारी व मुस्लिम शरीफ़)*

हुज़ूर नबीये अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि मेरी उम्मत में इख़्तिलाफ़ और इफ़्तिराक के वाक़ेअ़ होना लाज़िम हो चुका है। बस इस सिलसिलें में एक गिरोह निकलेगा जिसकी बातें बज़ाहिर दिलफ़रेब और ख़ुशनुमा होंगी लेकिन किरदार गुमराहकुन और ख़राब होगा। वो क़ुरआन पढ़ेंगें लेकिन क़ुरआन उनके हलक़ के नीचे नहीं उतरेगा। वो दीन से ऐसे निकल जाएंगें जैसे तीर शिकार से निकल जाता है। जैसे खाली छूटा तीर फिर वापस नहीं लौट सकता ऐसे ही फ़िर दीन की तरफ़ वापसी इन्हें नसीब न होगी, यहाँ तक के तीर अपने कमान की तरफ़ लौट आये। वह अपनी तबीअ़त और शरसत के लिहाज़ से बदतरीन मख़्लूक़ होंगे। वह लोगों को क़ुरआन और दीन की तरफ़ बुलाएंगे हालाँकि दीन से उनका कुछ भी ताअ़ल्लुक़ न होगा। जो उन्हें क़त्ल करेगा, वह अल्लाह का मुक़र्रब तरीन बन्दा होगा। सहाबाए किराम ने अर्ज़ की उनकी ख़ास निशानी क्या हैं ? इर्शाद हुआ- सर मुन्डाना। 
*📚 (मिश्कात शरीफ़, रावी-हज़रत अबू सईद ख़दरी रदिअल्लाहु अन्हु व हज़रत अनस रदिअल्लाहु अन्हु)*

 इसी मज़मून की एक और हदीस बुख़ारी शरीफ़ में हज़रत अली रदिअल्लाहु अन्हु से मरवी है।
जिसमें नबीये पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का ये फ़रमान शामिल है कि आख़िर ज़माने में नौउमर और कम समझ के लोगों की एक जमाअ़त निकलेगी। बातें वो बज़ाहिर अच्छी करेंगे लेकिन ईमान उनके हलक़ से नीचे न उतरेगा। 
*📚(बुख़ारी शरीफ़)*

 नबी-ए आख़िरूज़्ज़मा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- आख़िर ज़माने में कीड़े मकोड़े की तरह हर तरफ़ मौलाने फ़ट पड़ेंगे। तुममें से जो शख़्स वह जमाना पाये तो उसे चाहिए कि उनसे ख़ुदा की पनाह माँगे।

 नबी पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया आख़िर ज़माने में एक कौम निकलेगी, चढ़ती जवानी वाले, अक़ल से कोताह, ज़बानों से क़ुरआन पढ़ेंगे, गले से नीचे न उतरेगा। क़ाला-क़ाला (कहा-कहा) रसूलुल्लाह की रट लगाऐंगे, दीन से ऐसे निकले होंगे जैसा कि तीर शिकार से 
*📚(कन्ज़ुल आ़माल)*

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रदिअल्लाहु तआ़ला अन्हु इन लोगों को अल्लाह की तमाम मख़्लूक़ में बहुत बुरी निगाह से देखते थे और फ़रमाया- कि बेशक ये लोग ऐसी आयतों को जो कुफ़्फ़ार के मुताल्लिक़ नाज़िल हुयी हैं, उन्हें अहले ईमान पर चस्पा करेगें। 
*📚 (बुख़ारी शरीफ़)*
अल्लमा फै़ज़ अहमद उवैसी फ़रमाते हैं कि गुस्ताख़े रसूल, अज़रूऐ शरीअ़त वल्द अज़ ज़िना या वल्द अज़ हराम होता है।

*तशरीह:-* करते हुए लिखते हैं कि वालिदुज़्ज़िना वो है, जो अपने बाप के नुत्फ़े से न हो और वल्दुल हराम, वो है जो होता बाप के नुत्फ़े से लेकिन उसकी पैदाइश का हमल उस वक़्त ठहरा हो जब उसके बाप ने नापाकी की हालत में जिमाअ़ किया हो।

  *📚 (उलमा ए देवबंद के शैतानी अक़ाइद व हक़ाइक़, सफ़ह- 34)*

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