नज्दी, वहाबी, ग़ैर मुकल्लिद, देवबन्दी, की हक़ीक़त

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*🥀 नज्दी, वहाबी, ग़ैर मुकल्लिद, देवबन्दी, की हक़ीक़त 🥀*



🔛⁵ *ख़ास देवबन्दियों के मज़ीद अक़ाइद ये हैं:-👇*
1) रसूलुल्लाह ﷺ इस मअनीकर ख़ातिमुल अम्बिया नहीं कि आप सब में आख़िरी नबी हैं, अगर आपके ज़माने में या आपके ज़माने के बाद कोई नबी पैदा हो जाए तो ख़ात्मीयते मुहम्मदी में कुछ फ़र्क नहीं आएगा, आप बदस्तूर ख़ातिमुल-अम्बिया हैं।
*📚 तहज़ीररुन्नास*

2) शैतान का इल्म रसूलुल्लाह ﷺ से ज़ियादा है।
*📚 बुराहीने क़ातिअह*

3) रसूलुल्लाह ﷺ के इल्मे ग़ैब के तअल्लुक से) ऐसा इल्मे ग़ैब हर ज़ैद व अम्र बल्कि हर सबी (बच्चा) मजनून (पागल) बल्कि जमीअ हैवानात (जानवरों) व बहाइम (चौपायों) के लिये भी हासिल है।
*📚 हिफ़जुल ईमान*

4) अल्लाह तआ़ला झूट बोल सकता है? हर काम जो बन्दे कर सकते हैं वह भी कर सकता है।
*📚 तिहत्तर में एक' पेज़ नं 103/109*

*☝️इन सब अकीदों के इलावा और भी इस गिरोह के बहुत से कुफ़्र वाले अक़ीदे हैं इसलिए मक्का मुअज्जमा, मदीना तय्यिबा, हिंद, सिंध, बंगाल, पंजाब, बर्मा, मदरास, गुजरात, कठियावाड़ बिलोचिस्तान, सरहद और दकन व कोकन के सैकड़ों बड़े-बड़े आलिमों और मुफ्तियों ने इन लोगों के काफ़िर व मुरतद होने का फ़तवा दिया है, तफसील के लिए *“फतावा हुसामुल हरमैर” और “अस्सवारिमुल हिंदीया”* को पढ़ें।
*📚अनवारूल हदीस' पेज़ नं 37*

इस तरह के मज़ीद अक़ाइद देखने हों तो “वहाबी मज़हब और देवबन्दी मज़हब” नामी किताबें मुताअला फरमाएं।

*इंआम:-* जिन किताबों के हवाले दिए गए हैं अगर यह किताबें देवबन्दियों, वहाबियों की तस्नीफ शुदा नामी किताबें न हुईं तो फ़ी किताब एक हज़ार रुपए इंआम।
अगर कोई साहब इन बातों को या हवालों में से किसी एक हवाले को भी गलत साबित कर दें तो उन्हें पचास हज़ार (50,000) रुपए दिए जाएंगे।
*📚 क़रीना-ए-जिन्दगी' पेज़ नं 24*

सरकारे दो आ़लम नूरे मुजस्सम शहनशाहेउमम महबूबे रब्बे अकरम ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया अल्लाह अ़ज़्ज़ व जल्ल' की क़सम अगर अल्लाह तआ़ला तुम्हारे ज़रीये किसी एक को भी हिदायत दे दे तो येह तुम्हारे लिये सुर्ख ऊंटों से बेहतर है। और फ़रमाया जो शख़्स मेरी उम्मत तक कोई इस्लामी बात पहुंचाएं ताकि उस से सुन्नत काइम की जाए या उस से बद मज़हबी दूर की जाए तो वोह जन्नती हैं।

*🎰 कल इसके आगे...........*



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