मेरा कोई फिरका नहीं है मैं सिर्फ मोहम्मदी हुं मैं फिरको को नहीं मानता।
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*🥀 मेरा कोई फिरका नहीं है मैं सिर्फ मोहम्मदी हुं मैं फिरको को नहीं मानता। 🥀*
🔛 ना मैं वहाबी हु ना देवबंदी, ना बरेलवी ना अहले हदीस, ना तब्लीगी ना जमाते इस्लामी ना शिया, मेरा कोई फिरका नही है मैं मोहम्मदी हुं मैं फिरको को नही मानता सब फिरके सही है ऐसा कहनेवाला "सुलेहकुल्लि" है इस्लाम से खारिज है लिहाज़ा मुसलमानों से गुज़ारिश है कि ऐसे जानवर जा़हिल शख़्स से दूर रहें
हदीस शरीफ़ में आया है कि हुज़ूर सल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया " मेरी उम्मत में 73 फिरके होंगे उसमे से 72 जहन्नम में जायेंगे सिर्फ 1 फिरका जन्नत में जायेगा।
*📚 तिर्मिज़ी शरीफ़, जिल्द 2, सफ़ह 89*
*📚 मिश्कात शरीफ़ जिल्द 1, सफ़ह 52*
तो जब सरकार सल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने जिसको जन्नती कहा वो फिरका है कोई एक आदमी नही है अब जो शख़्स कहे की मैं किसी फिरके से नही हु तो गोया वो जन्नती फिरके से निकल गया और जहन्नमी फिरके में उसका शुमार हुआ और ऐसी बोली आज कल सुलेहकुल्लि बोलते है वो सब फिरको को सही मानते है और आपस में मिल झुल कर रहने की बात करते है !
अगर वो किसी फिरके को सही नही मानते तो इसका मतलब ये हुआ की जिस फिरके की शहादत हुज़ूर सल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने दी ये उसको भी गलत मानते है और जो हुजूर नूरे मुज्जसम सरवरे का़यनात ﷺ की बात को गलत माने वो खुद गलत है और अगर ये सभी फिरको को सही मानते है तो इसका मतलब ये हुआ की जो फिरके कुफ़्र कर के इस्लाम से खारिज़ हुए उनको ये मुसलमान मानते है और काफिर को मोमिन मानना कुफ़्र है अल गरज ऐसा शख़्स इस्लाम से खारिज है !
इसी लिए सभी मोमिन भाइयो और मोमिना बहनों को ऐसे शख़्स से दूर रहना चाहिए क्यों की जो शख़्स हदीस को ना माने हदीस का मुनकिर हो वो तुम लोगो का दोस्त भाई कभी नही हो सकता।
*वो जहन्नम में गया जो उनसे मुस्तग़्नी हुआ।*
है खलीलुल्लाह को, हाजत रसूल-अल्लाह की ﷺ
*सूरज उल्टे पाँव पलटे, चाँद इशारे से हो चाक।*
अधें नजदी देख ले, क़ुदरत रसूल-अल्लाह की
*तुझसे और जन्नत से क्या मतलब, वहाबी दूर हो*
हम रसूल-अल्लाह के, जन्नत रसूल-अल्लाह की
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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