नज्दी, वहाबी, ग़ैर मुकल्लिद, देवबन्दी, की हक़ीक़त

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*🥀 नज्दी, वहाबी, ग़ैर मुकल्लिद, देवबन्दी, की हक़ीक़त 🥀*



🔛 अगर आप अहले सुन्नत सुन्नी ह़नफ़ी बरेलवी हैं तो एक बार इस पोस्ट को आखिर तक ज़रूर पढ़ें, अगर आप में यह वायरस घुस चुका है तो यह पोस्ट आपके लिए एंटीडोट का काम करेगा।

नज्दी: यह फ़िर्का बारहवीं सदी के अख़ीर और तेरहवीं सदी के शुरू में ज़ाहिर हुआ।
इस फ़िर्के का बानी मुहम्मद बिन अब्दुल वहाब नामी एक शख़्स है जो नज्द की एक बस्ती ऐनिय्यह में पैदा हुआ था।
इसके बाप दादा पीरी मुरीदी करते थे जिसकी वजह से इसके ख़ानदान का नज्द में काफ़ी असर था।
इसने दरइय्यह के हाकिम मुह़म्मद बिन सऊद से अपनी लड़की ब्याही और उसको अपना दामाद बना लिया, फिर उसको साथ लेकर तलवार के ज़ोर से अपने फ़िर्के को फैलाना शुरू किया।
पहले आस पास के छोटे छोटे इलाक़ों को ज़ेर किया फिर नज्द से हिजाज़ तक क़ाबिज़ हो गया।
उस वक़्त हिजाज़ पर तुर्कों की हुकूमत थी मगर उन दिनों तुर्क बरतानियह, जर्मनी के साथ जन्ग में उल्झे हुए थे इस लिये इब्ने सऊद ने आसानी से हिजाज़ पर क़ब्ज़ा कर लिया और वहाँ के हज़ारहा बाशिन्दों को क़त्ल किया।
फिर जब तुर्कों को इत्मीनान मिला तो तुर्कों ने इनको हिजाज़ ही नहीं बल्कि नज्द से भी निकाल बाहर किया।

फिर 1814 ईसवी की जन्ग के बाद तुर्क अपने मेहदूद इलाक़े में रह गए और हिजाज़, शाम, मिस्र वग़ैरह के लोगों ने अपनी अपनी हुकूमतें क़ाइम कीं तो बरतानियह की इम्दाद से अब्दुल अज़ीज बिन सऊद ने फिर पूरे नज्द व हिजाज़ पर क़ब्ज़ा कर लिया और तुर्को को निकाल बाहर कर दिया।
*☝️इनको वहाबी कहा जाता है।*

इनकी मज़हबी किताब 
*“📚किताबुत्तौहीद”* है जो इब्ने अब्दुल वहाब ने लिखी है।

*इस फ़िर्के के बुनियादी अक़ाइद ये हैं:-*
1) सिवाए उनके (वहाबियों के) पूरी दुनिया के मुसलमान काफ़िर मुशरिक हैं, उनसे जिहाद करना उनको क़त्ल करना उनके मुल्कों को लूटना बहुत बड़े सवाब का काम है।

2) एहले सुन्नत का यह अक़ीदा है कि अल्लाह तआ़ला ने अम्बिया व औलिया को यह क़ुव्वत (ताकत) बख़्शी है कि लोगों की मदद करें, यह क़ुव्वत उन्हें ज़िन्दगी में भी हासिल है और फ़ौत होने के बाद भी हासिल रहती है।
*जबकि नज्दी वहाबी यह कहते हैं कि अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल' के अलावा किसी नबी वली से मदद मांगना शिर्क है।*

3) तमाम एहले सुन्नत का अक़ीदा है कि अम्बिया औलिया क़यामत के दिन गुनाहगारों की शफ़ाअ़त करेंगे।
*जबकि वहाबी नज्दी शफ़ाअत के मुन्किर हैं।*

4) तमाम एहले सुन्नत व जमाअत मीलाद व फ़ातिहा, उर्स वग़ैरह करते हैं।
*जबकि वहाबी नज्दी इन सबको हराम व गुनाह कहते हैं।*

इन मज़्कूरह बाला फ़िर्कों के अलावा बहुत से छोटे छोटे फ़िर्के पैदा हुए जो मेहदूद दायरे में रह कर चन्द दिन बाद फ़ना हुए।

*🎰 कल इसके आगे...........*



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